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गति के समीकरण 20 न्यूमेरिकल प्रश्न

   गति के समीकरण (Equations of Motion) – 20 न्यूमेरिकल ▫️ उपयोगी सूत्र 1. v = u + at 2. s = ut + 1/2at2 3. v^2 = u^2 + 2as ⸻ प्रश्न 1.एक वस्तु विराम से चलकर 4 m/s² के त्वरण से 5 s तक चलती है। अंतिम वेग ज्ञात कीजिए। हल: u = 0, a = 4 m/s², t = 5 s v = u + at v = 0 + (4 × 5) = 20 m/s ⸻ प्रश्न 2. एक साइकिल 2 m/s के वेग से चल रही है। 3 m/s² के त्वरण से 4 s तक चलती है। अंतिम वेग ज्ञात कीजिए। हल: u = 2, a = 3, t = 4 v = u + at = 2 + 12 = 14 m/s ⸻ प्रश्न 3. एक धावक 10 m/s के वेग से चल रहा है। 2 m/s² के ऋणात्मक त्वरण से 5 s में रुक जाता है। विस्थापन ज्ञात कीजिए। हल: u = 10, a = –2, t = 5 s = ut + ½at² s = (10×5) + ½(–2)(25) s = 50 – 25 = 25 m ⸻ प्रश्न 4. एक ट्रेन 20 m/s के वेग से चल रही है और 1 m/s² से धीमी होती है। रुकने तक चली दूरी ज्ञात कीजिए। हल: u = 20, v = 0, a = –1 v² = u² + 2as 0 = 400 – 2s s = 200 m ⸻ प्रश्न 5. एक स्कूटर विराम से चलकर 2.5 m/s² के त्वरण से 8 s में चलता है। दूरी ज्ञात कीजिए। हल: u = 0, a = 2.5, t = 8 s = ½at² = ½ × 2.5 × 64 = 80 m ⸻ प्रश्न 6. एक कार 10 m/s से...

संधि किसे कहते हैं संधि के प्रकार

                         संधि

संधि किसे कहते हैं संधि के प्रकार


संधि (सम्+धि) साधारण अर्थ 'मेल' या जोड़ होता है । मेल से अर्थ में कोई परिवर्तन नहीं होता है । व्याकरणानुसार संधि की परिभाषा इस प्रकार है-

संधि की परिभाषा- एक विशेष अवस्था में दो वर्णों (अक्षरों) के मेल को 'संधि' कहते हैं । विशेष अवस्था का आशय यह है कि दो वर्ण के मेल से जो रूप या विकार में परिवर्तन होता है, इसी को संधि कहते हैं । यहां पर ध्यान रखने योग्य बात है कि हर संयोग या मेल संधि नहीं होते । इसके उदाहरण इस प्रकार हैं-

संधि- (1) महेश = महा+ईश । इसमें आ + ई = ए हो गया है ।

(2) जानकीश = जानकी + ईश । ई + ई = ई हो गया है ।

(3) महाशय = महा + आशय । इसमें आ + आ = आ हो गया है ।

(4) निष्कपट = नि: +कपट । इसमें ष् का विसर्ग हो गया ।

संयोग- (1) प्रतिदिन = प्रति + दिन = हमेशा । यह भी अर्थ परिवर्तन है ।

(2) पंचानन = पंच + आनन = पांच मुख वाला इसमें अर्थ परिवर्तन हो जाता है ।

(3) जलधारा = जल + धारा = जल की धारा । इसमें भी अर्थ परिवर्तन है ।

           संधि के प्रकार

वर्णमाला में संधि तीन प्रकार की होती है ।

(1) स्वर संधि,

(2) विसर्ग संधि,

(3) व्यंजन संधि ।

(1) स्वर संधि- दो स्वरों के मिलने से जो विकार या रूप परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं ।

जैसे- कपीश- कपि + ईश = इ + ई का मेल ।

गंगोध- गंगा + औध = आ + ओ का मेल ।

राजेन्द्र- राज + इंद्र = आ + इ का मेल ।

(2) व्यंजन संधि- व्यंजन का व्यंजन से या स्वर से जो मेल होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं ।

जैसे- दिग्पाल- दिक् + पाल = दिग्पाल,

तन्मय- तत + मह = तन्मय,

सदानन्द- सत + आनन्द = सदानन्द आदि ।

(3) विसर्ग सन्धि- विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल को विसर्ग संधि कहते हैं । जैसे-

निर्जन = नि: + जन । र का विसर्ग ।

मनोहर = मन: + हर । ओ का विसर्ग ।

निष्ठुर = नि: + ठुर । ष का विषर्ग ।

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